Wednesday, July 11, 2018

MS Word In Hindi:

Word 2007 एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्‍तेमाल लेटर्स, एसए, स्‍टेटमेंट, रिपोर्ट की 
तरह टेक्‍स्‍ट बेस डॉक्युमेंट्स बनाने के लिए इस्तेमाल होता है। इसके अलावा वर्ड में आप मार्केटिंग
 उद्देश्य के लिए लेटर को एक साथ कई एड्रेस पर भेज सकते हैं। एमएस वर्ड में आप वेब पेज भी 
बना सकते हैं।
एमएस वर्ड को वर्ड प्रोसेसर के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।

Getting Started :
Learn MS Word Hindi. एमएस वर्ड 2007 को स्‍टार्ट करने के लिए Word 2007 के डेस्‍कटॉप आइकन पर क्लिक करें या Start-All Programs-Microsoft Office-Microsoft Word 2007 में जाएं।

Window of Word 2007 looks like –

Office Element :
1) Title Bar :
यह वर्ड विंडो के सबसे उपर स्थित होता है। यह जिस डॉक्युमेंट्स में आप वर्तमान में काम कर रहे हैं उसका नाम डिस्‍प्‍ले करता है। टाइटल बार के दाईं ओर Minimize, Maximize/Restore और Close के बटन होते है। और इसके लेफ्ट साइड में एक Quick Access टूल बार होता है।

2) Ribbon:
रिबन पहले के वर्जन के मेनू और टूलबार की जगह में आया हैं। इसमें विशिष्‍ट टास्‍क से संबंधित कमांडस् को ब्राउज़ करने के लिए टैब होते है। इसके आगे यह टैब ग्रुप में डिवाइड होते हैं।
हम इस रिबन को हाइड भी कर सकते है, इसके लिए इस रिबन पर कहीं भी राइट क्लिक कर Minimize the Ribbon button पर राइट क्लिक करें या फिर राइड साइड के Minimize the Ribbon (Ctrl+F1) बटन पर क्लिक करें। रिबन को हाइड करने पर आपको काम करने के लिए अधिक स्‍पेस मिलती है। रिबन को फिर से अनहाइड करने के लिए Expand the Ribbon (Ctrl+F1) बटन पर क्लिक करें।

Ribbon Contains Three Main Parts –
i) Tabs – यह टास्‍क ओरिएंटेड होते है और रिबन के टॉप पर स्थित होते हैं। उदाहरण के लिए, Home, Inset, Page Layout आदि।
ii) Groups- प्रत्येक टैब आगे सब टास्‍क में डिवाइड किया गया है। उदाहरण के लिए, Home टैब को Clipboard, Font, Paragraph, Styles और Editing ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप के राइट साइड में एक छोटा ऐरो होता है, जिसे Dialog Box Launcher कहा जाता है। इसपर क्लिक करने पर अतिरिक्त ऑप्‍शन उपलब्‍ध होते है।
iii) Command Buttons – यह बटन्‍स प्रत्येक ग्रुप के रिलेटिव होते हैं। उदाहरण के लिए, Font ग्रुप में Bold, Italic, Underline आदि कमांडस् बटन्‍स शामिल होते है।

Tabs That Appear Only When You Need Them
उपर दिए गए टैब्‍स के अलावा,  यहाँ टैब्स के अन्य प्रकार भी हैं। लेकिन वे जब आप उनसे संबंधित टास्‍क कर रहे होते है, तभी दिखाई देते है।

Contextual Tools : जब आप किसी ऑब्‍जेक्‍ट पर काम कर रहे होते है और जब आप उस ऑब्‍जेक्‍ट को सिलेक्‍ट करते है, तब यह टैब आपको दिखाई देगा।
e.g. –
  • वर्ड में एक इमेज इन्सर्ट करें।
  • जब आप इमेज को सिलेक्‍ट करेंगे, तब आप Format Tab रिबन के राइट साइड में देख सकते है।

3) File Button :
यह बटन वर्ड विंडो के उपर लेफ्ट कॉर्नर में होता है। इस बटन पर New, Open, Save, Save As, Print and Close जैसे कमांड के बटन होते है।

4) Quick Access Toolbar:
Office बटन के राइट साइड में Quick Access Toolbar होता है, जिसमें हमेशा इस्‍तेमाल होने वाले आइटम के बटन होते है। उदा, Save, और Undo या Redo बटन। इस टूलबार में और बटन्‍स को एड करने के लिए इसके राइड साइड के छोटे ऐरो पर क्लिक करें‍।

5) The Status Bar
स्‍टेटस बार विंडो के निचे स्थित होता है और इसमें वर्तमान पेज नंबर, सेक्‍शन, डॉक्युमेंट्स में कुल शब्‍दों की संख्‍या आदि डिस्‍प्‍ले होता है। इस बार पर राइट क्लिक कर आप अन्‍रू ऑप्‍शन सिलेक्‍ट कर सकते है।

5) Zoom Slider
विंडो के राइट कॉर्नर में स्‍टेटस बार पर यह Zoom slider होता है। डॉक्युमेंट को अलग अलग जूम के परसेंटेज देखने के लिए प्‍लस या माइनस बटन पर क्लिक करें।

6) Document View Buttons
Zoom Slider के लेफ्ट साइड में Document View बटन्‍स होते है। अपने डॉक्‍युमेंट को Print Layout, Full Screen, Web Layout, Outline या Draft में देखने के लिए आप इनमेंसे किसी एक पर क्लिक कर सकते है।

Learn MS Word Hindi:

Menu In MS Word 2007:

1) File :
File मेनू में निचें के कमांडस्‍ है:
a) Save (Ctrl+S) : इस कमांड को डॉक्‍युमेंट सेव करने के लिए यूज किया जाता है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब निचें का एक डायलॉग बॉक्‍स दिखाई देता है।
File Name : यहाँ आप फाइल के लिए नाम दे सकते है।
Save As : यहाँ फाइल फॉर्मेट  एक लिस्‍ट होती है, जिसमें वह फाइल सेव होती है। डिफ़ॉल्ट रूप से यहाँ Word Document फॉर्मेट सिलेक्‍ट होता है, जिसमें यह डॉक्‍युमेंट वर्ड 2007 के फॉर्मेट मे सेव किया जाता है।
अगर आप पूराने वर्जन में सेव करना चाहते है, तो Word 97-2003 फॉर्मेट को सिलेक्‍ट करें।


यदि आप इस फाइल को पीडीएफ फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो PDF सिलेक्‍ट करें।
यदि आप इस फाइल को वेब पेज फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो web page सिलेक्‍ट करें।

Tools : यह बटन Save के लेफ्ट साइड में होता है। इसमें डॉक्‍युमेंट सेव करने के लिए अतिरिक्‍त्‍ ऑप्‍शन होते है। यहाँ आप अपने डॉक्‍युमेंट को प्रोटेक्‍ट करने के लिए पासवर्ड सेट कर सकते है।

b) Save As :
यदि आप पहले से क्रिएट फाइल को दूसरे नाम से या दूसरे फॉर्मेट में सेव करना चाहते है, तो Save As कमांड का उपयोग करें।

c) Open (Ctrl+O):
पहले से क्रिएट डॉक्‍युमेंट फाइल को ओपन करने के लिए यह कमांड होती है। जब आप इस कमांड पर क्लिक करते है, तब एक डॉयलॉग बॉक्‍स ओपन होता है, जिसमें आपको अपने फाइल का पाथ देता है। फिर Open बटन पर क्लिक करना होता है।

d) Close :
बिना एमएस वर्ड क्‍लोज किए ओपन फाइल को क्‍लोज करने के लिए इस कमांड का उपयोग करें।

e) Info :
इसमें करंट डॉक्यूमेंट से संबंधित निम्‍न जानकारी होती है –
i) Product Activation : इसमें Office 2007 के लाइसेंस की जानकारी होती है।
ii) Permission : दूसरे यूजर्स से अपने फाइल को प्रोटेक्‍ट करने के लिए यहाँ आप एक पासवर्ड सेट कर सकते है। लेकिन याद रहे की अगर आप यह पासवर्ड भूल गए तो इस पासवर्ड को पुनः प्राप्त नही कर सकते।

f) Recent :
यहाँ पिछली बार ओपन किए डॉक्‍यूमेंट फाइलों की एक लिस्‍ट होती है, जिनपर क्लिक करने से आप तुरंत वे फाइलें ओपन कर सकते है।

g) New (Ctrl+N):
इस कमांड को उपयोग एक ब्‍लैंक डॉक्‍यूमेंट क्रिएट करने के लिए होता है। इसके साथ ही यहाँ कई टेम्प्लेट्स भी होते है।

h) Print (Ctrl+P):
डॉक्‍यूमेंट को प्रिंट करने के लिए इस कमांड का उपयोग होता है। इसमें निचें के ऑप्‍शन होते है –
i) Print : इस बटन पर क्लिक करने पर फाइल को प्रिंट करने के लिए भेज दिया जाता है।
ii) Copies : यहाँ से आप इस डॉक्‍यूमेंट की कितनी कॉपीज़ प्रिंट करनी है यह तय कर सकते है।
iii) Printer : यहाँ आपके पीसी पर इंस्‍टॉल प्रिंटर कि लिस्‍ट होती है, जिसमें से आपको प्रिंटर सिलेक्‍ट करना होता है।
iv) Settings : यहाँ इस फाइल के कौनसे पेजेस को प्रिंट करना है, यह तय कर सकते है।























Monday, July 9, 2018

MS Word Tutorial in Hindi


MS Word Tutorial in Hindi में आपका स्वागत है. MS Word Tutorial in

 Hindi में आपको MS Word से संबंधित Tutorials उपलब्ध करवायें जाते है. MS

 Word Tutorial in Hindi में MS Word के Tutorials सरल भाषा में उपलब्ध 

है. MS Word Tutorial in Hindi में उपलब्ध Tutorials सभी सीखने वालों के लिए

 उपयोगी होंगे ऐसा हमारा विश्वास है.


MS Word Tutorial in Hindi में उपलब्ध Tutorials नीचे क्रम से दिए गए है. आप

 जिस Tutorial को सीखना चाहते है, उस पर क्लिक कीजिए और आपका सीखना

 चालु हो जाएगा. तो देर किस बात कि सीखना चालु करें-



अपना Lesson चुने

  1. MS Word क्या है? – What is MS Word?
  2. MS Word के क्या उपयोग है? – Use of MS Word.
  3. MS Word के कितने संस्करण है? – How Many Versions of MS Word?
  4. कम्प्युटर में MS Word कैसे स्थापित (install) करें? – How to Install MS Word?
  5. MS Word को कैसे खोले? – How to Open MS Word?
  6. MS Word के कुछ बेसिक्स सीखीए – Some Basics of MS Word?
    • 6.1. MS Word में एक डॉक्युमेंट को खोलना – Opening a Document in MS Word?
    • 6.2. MS Word में एक डॉक्युमेंट को बंद करना – Closing a Document in MS Word?
    • 6.3. MS Word में एक डॉक्युमेंट को रक्षित करना – Saving a Document in MS Word?
    • 6.4 किसी शब्द/शब्द समूह आदि को Cut करना – Cut in MS Word?
    • 6.5 किसी शब्द/शब्द समूह आदि को Copy करना – Copy in MS Word?
    • 6.6 किसी शब्द/शब्द समूह आदि को Paste करना – Paste in MS Word?
    • 6.7 किसी शब्द/शब्द समूह को Select करना – Selecting Words and Lines in MS Word?
    • 6.8 एक MS Word डॉक्युमेंट को कैसे प्रिंट करें – How to Print a MS Word Document?
    • 6.9 एक MS Word डॉक्युमेंट का Print Preview कैसे देंखे – How to Print Preview a MS Word Document?
    • 6.10 MS Word में एक नया डॉक्युमेंट को खोलना – Opening a New Document in MS Word?
    • 6.11 MS Word में एक New Template कैसे Open करें – Opening a New Template in MS Word?
  7. MS Word में ‘Office Button’ का उपयोग करना – Using Office Button in MS Word?
  8. MS Word में ‘Quick Access Toolbar’ का उपयोग करना – Using Quick Access Toolbar in MS Word?
  9. MS Word की ‘Home Tab’ का उपयोग – Using ‘Home Tab’ of MS Word?
  10. MS Word की ‘Insert Tab’ का उपयोग – Using ‘Insert Tab’ of MS Word?
  11. MS Word की ‘Page Layout Tab’ का उपयोग – Using ‘Page Layout Tab’ of MS Word?
  12. MS Word की ‘References Tab’ का उपयोग – Using ‘References Tab’ of MS Word?
  13. MS Word की ‘Mailings Tab’ का उपयोग – Using ‘Mailings Tab’ of MS Word?
  14. MS Word की ‘Review Tab’ का उपयोग – Using ‘Review Tab’ of MS Word?
  15. MS Word की ‘View Tab’ का उपयोग – Using ‘View Tab’ of MS Word?




MS Word क्या है – What is Microsoft Word?


MS Word, जिसका पूरा नाम ‘Microsoft Word’ है तथा इसे ‘Word’ के नाम से भी

 जानते है, एक Word Processor है जो document को open, create, edit,

 formatting, share एवं print आदि करने का कार्य करता है. MS Word को

 Microsoft द्वारा विकसित किया गया है जो Microsoft Office का एक भाग है.

 MS Word अपने पहले संस्करण से अब तक अपने क्षेत्र पर राज कर रहा है.

 MS Word 2007 की विंडो कुछ इस प्रकार दिखाई देती है.






आप भी अपने कम्प्युटर मे MS Word को Open कर इसे देख सकते है. यदि

 आपको MS Word open करना नही आता है तो आप ‘MS Word को कैसे Open करें

 Tutorial से MS Word को Open करना सीख सकते है. इस Tutorial मे MS

 Word को Open करने के कई तरीके बताए गए है.


MS Word की विंडो को कई भागों में बाँटा गया है. जिन्हे ऊपर चित्र में एक रेखा के माध्यम से नाम सहित दिखाया गया है. आइए MS Word की विंडो के प्रत्येक भाग को क्रम से जानते है.

1. Office Button

Office Button MS Word का एक प्रमुख भाग है. यह बटन menu bar में होता है. इस बटन में MS Word में बनने वाली फाईल या डॉक्युमेंट के लिए कई विकल्प होते है.


2. Quick Access Toolbar

Quick Access Toolbar MS Word का एक विशेष भाग है. यह टूलबार Title bar में होता है. इसे हम शॉर्टकट की तरह उपयोग मे लेते है. इस टूलबार में अधिकतर काम आने वाली commands को ap कर दिया जाता है और वे इसमे जुड जाती है. Quick Access Toolbar की सहायता से MS Word में कार्य थोडी speed से हो पाता है.

3. Title bar

Title bar MS Word विंडो का सबसे ऊपरी भाग है. इस बार पर Word मे बनाई गई फाईल के नाम को दिखाया जाता है. जब तक फाईल को रक्षित (save) नही किया जाएगा फाईल का नाम नही दिखाया जाता है और वहां “Document1” लिखा होता है. जैसे ही हम फाईल को किसी नाम से रक्षित (save) करते है तब “Document1” के स्थान पर फाईल नाम दिखाया जाता है.
Title bar के दांये कोने में तीन बटन होते है. इन तीन बटन में पहला बटन “Minimize” होता है जिस पर क्लिक करने से Open Program Task Bar में आ जाता है. दूसरा बटन “Maximize or Restore down” होता है. यह बटन विंडो की width को कम या ज्यादा करने का कार्य करता है. और तीसरा बटन “Close button” है जो प्रोग्राम को बंद करने का कार्य करता है.

4. Ribbon

Ribbon MS Word विंडो का एक और भाग है. यह menu bar से नीचे होता है. इस पाठ मे दिखाई गई MS Word विंडो में लाल रंग का हिस्सा ही ribbon है. इस भाग में MS Word tabs (जो विकल्प menu bar में होते है) के विकल्पों को दिखाया जाता है.

5. Menu bar

Menu bar MS Word में टाईटल बार के नीचे होती है. इसे tab bar भी बोल सकते है क्योंकि इन्हें अब टेब ही बोला जाता है. Menu bar में कई विकल्प होते है और प्रत्येक की अपनी ribbon होती है.

6. Ruler bar

Ruler bar MS Word दो तरफ होती है. पहली text area के बिल्कुल ऊपर होती है तथा दूसरी text area के बांये तरफ होती है. इससे हमें page margin का पता चलता है.

7. Status bar

Status bar MS Word में text area के बिल्कुल नीचे होती है. इस बार में “Zoom Level” नामक टूल होता है जिसकी सहायता से page को zoom in तथा zoom out किया जा सकता है. इसके अलावा भी बहुत से टूल इस बार में होते है जैसे; Language, Word Count, Page Number आदि.

8. Scroll bar

Scroll bar MS Word में दांये तरफ एक लम्बवत (vertically) बार होती है जो page को ऊपर-नीचे करने का कार्य करती है.

9. Text Area

Text Area MS Word का सबसे मह्त्वपूर्ण भाग है. और यह MS Word विंडो का सबसे बडा तथा मध्य भाग होता है. इसी क्षेत्र मे document text को लिखा जाता है.

आपने क्या सीखा?

इस Lesson में आपने MS Word के बारे में जाना है. आपने जाना कि Microsoft Word की Window के कितने भाग होते है. हमे उम्मीद है कि यह Lesson आपके लिए उपयोगी साबित होगा.



















Antivirus क्या होता है यह कैसे काम करता है इसके फायदे और नुकसान


Antivirus क्या होता है यह कैसे काम करता है इसके फायदे और नुकसान




आज अनगिनत लोग मोबाइल और कंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं और हम सब कंप्यूटर और मोबाइल में अपना पर्सनल डाटा जैसे की वीडियो ऑडियो फोटो इत्यादि सेव करके रखते हैं. और जब भी हमें जरुरत पड़ती है तब हम इनका इस्तेमाल में बड़ी ही आसानी से कर सकते हैं.लेकिन हम यह कभी नहीं सोचते कि अगर कभी हमारा डाटा हमारी मर्जी के बगैर चोरी हो जाए या खराब कर दिया जाए या है कर दिया जाए तो हम क्या करेंगे शायद ही आपके साथ ऐसा कभी हुआ हो कि आपके फोन या कंप्यूटर का डाटा खराब हो गया हो और आपको उसका कारण भी पता ना चला हो.
कंप्यूटर में या फ़ोन में डेटा खराब होने के सिर्फ कुछ ही कारण होते हैं और जिनमें सबसे बड़ा कारण होता है वायरस. कुछ लोग दूसरों के कंप्यूटर और फोन को खराब करने के लिए या अपने फायदे के लिए दूसरे लोगों के फोन और कंप्यूटर के डाटा को हैक कर लेते हैं उसे खराब कर देते हैं इन्हीं सब से बचने के लिए हम एंटीवायरस का इस्तेमाल करते हैं तो अगर आपको नहीं पता की What Is Antivirus In Hind ? तो इस पोस्ट में हम आपको Antivirus Kya Hai , Ye Kaise Kaam Karta Hai के बारे में पूरी जानकारी देंगे .

Antivirus क्या है

Antivirus Definition And Examples In Hindi ?  What Is Antivirus In Computer In Hindi ? एंटीवायरस सॉफ्टवेयर एक ऐसा प्रोग्राम है जो कि कंप्यूटर में आने वाले वायरस को सर्च करके उन्हें कंप्यूटर से डिलीट करता है और कंप्यूटर में आने से रोकता है .जिससे हमारा कंप्यूटर ज्यादा सुरक्षित रहता है.अगर आप अपने कंप्यूटर पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं. तो आपके कंप्यूटर पर वायरस Malicious खाना बहुत ही आसान है. क्योंकि इंटरनेट पर ऐसी बहुत सारी वेबसाइट है जो कि सिर्फ यही काम करती हैं कि लोगों के कंप्यूटर में वायरस डालना और उनके कंप्यूटर को हैक करना क्या उनके डाटा को ख़राब  करना तो इन सब वायरस Malicious से बचने के लिए हम कंप्यूटर में एंटीवायरस का इस्तेमाल करते हैं.
पहले के मुकाबले अब इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होने लग गया है. इसी कारण पहले के मुकाबले अब और भी ज्यादा खतरनाक वायरस कंप्यूटर में आने का खतरा रहता है और सभी वायरस एक जैसे काम नहीं करते कुछ वायरस सिर्फ आपके कंप्यूटर को हैक करने के लिए होते हैं कुछ वायरस आपके डाटा को खराब करने के लिए होते हैं और कुछ वायरस बहुत ज्यादा खतरनाक होते हैं जो कि आपके पूरे कंप्यूटर डाटा को लॉक करके और आपसे उसे अनलॉक करने के बदले फिरौती मांग सकते हैं.

Antivirus कैसे काम करता है

एंटीवायरस हमारे कंप्यूटर की सभी फाइलों को स्कैन करता है और स्कैन करते समय हर एक एंटीवायरस अलग अलग तरीके का इस्तेमाल करते हैं. जिससे उन्हें हमारी फ़ाइल और वायरस के बीच में अंतर पता चल जाता है और वह हमारे कंप्यूटर में आने वाले वायरस को पहचान लेते हैं और उन्हें कंप्यूटर में आने से रोकते हैं. लेकिन वायरस को स्कैन करने का तरीका या वायरस का पता लगाने का तरीका अलग-अलग होता है क्योंकि वायरस अलग-अलग तरह के होते हैं तो उन्हें डिटेक्ट करने के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है.
  1. Signature-Based Detection
  2. Heuristic-Based Detection
  3. Behavioural-Based Detection
  4. Sandbox Detection
  5. Data Mining Techniques

Antivirus के फायदे

एंटीवायरस को इस्तेमाल करने के बहुत सारे फायदे हैं . चाहे एंटीवायरस अपने फोन में इंस्टॉल करें.या फिर कंप्यूटर में . तो नीचे आपको एंटीवायरस इस्तेमाल करने के कुछ फायदे बताए गए हैं.
Real-Time Protection :– हमारे कंप्यूटर में वायरस आने का कोई समय नहीं होता वायरस किसी भी समय हमारे कंप्यूटर पर अटैक कर सकता है वह हमारे कंप्यूटर को खराब कर सकता है. इसीलिए एंटीवायरस हर समय हमारे कंप्यूटर को सेकंड करता रहता है और हर समय आने वाले वायरस को डिलीट करता रहता है. इस तरह एंटीवायरस हर समय हमारी कंप्यूटर में काम करता है.
संवेदनशील जानकारी का संरक्षण :– इंटरनेट पर बहुत सारी वेबसाइट ऐसी होती हैं जो आपके पर्सनल डाटा को हैक करने की कोशिश करती है या आपकी प्राइवेट जानकारी को चुराने की कोशिश करती है तो इन सबको एंटीवायरस रोक देता है और आपकी प्राइवेट जानकारी सुरक्षित रहती है.
Scanning Of Individual Files :– हमारे कंप्यूटर में और हमारे मोबाइल में बहुत सारी फाइलें होती हैं जिन्हें हम ओपन करके ही उनके बारे में जान सकते हैं कि यह फाइल किस काम की है लेकिन एंटीवायरस उस फाइल को बिना ओपन किए ही स्कैन कर लेता है कि इस फाइल में वायरस है या यह फाइल हमारे कंप्यूटर या मोबाइल को कोई हानि पहुंचा सकती है या नहीं अगर एंटीवायरस को लगता है कि यह फाइल हमारे फोन या कंप्यूटर को नुकसान कर सकते हैं तो वह उस फाइल को डिलीट कर देता है या आपको नोटिफिकेशन देगा कि हमें एक वायरस की फाइल मिली है इसे आप डिलीट करना चाहते हैं या रखना चाहते हैं.

Antivirus के नुकसान


अगर किसी वस्तु का फायदा होता है तो उसी के साथ उसका कोई ना कोई नुकसान जरूर होता है और इसी तरह एंटीवायरस के फायदे होने के साथ-साथ इसके कुछ नुकसान भी होते हैं जो कि आपको नीचे दिए गए हैं.
Detection Techniques :- सभी एंटीवायरस वायरस को स्कैन या सर्च करने के लिए एक ही तरीका अपनाते हैं लेकिन अगर कोई नया वायरस आ जाता है तो एंटीवायरस उसे सेकंड नहीं कर पाता और वह हमारे कंप्यूटर को नुकसान कर देता है.
Doesn’t Fully Protect :- हर एक एंटीवायरस आपके कंप्यूटर को अलग अलग तरीके से सेकंड करता है और उन्हें वायरस से बचाता है लेकिन फिर भी सबकी एंटीवायरस में कोई ना कोई कमी रह जाती है और वह आपके कंप्यूटर को कहीं ना कहीं से स्कैन नहीं कर पाते जैसे कि अगर कोई एंटीवायरस आपके इंटरनेट से आने वाले वायरस को स्कैन करता है तो वह एंटीवायरस आपके कंप्यूटर में किसी और तरीके से आने वाले वायरस को नहीं रोक सकता तो यह इसकी एक बहुत बड़ी कमी है.
Slows Down PC :-हमारे कंप्यूटर में हजारों पहले होती है तो जब हम किसी फोल्डर को ओपन करते हैं तो उसके फाइल को एंटीवायरस स्कैन करता है और इसीलिए 1- 1 फाइल को स्कैन करने में बहुत ज्यादा समय लग जाता है और इसके कारण हमारे कंप्यूटर की स्पीड कम हो जाती है. और इसी तरह इंटरनेट पर भी अगर हमने एंटीवायरस का इस्तेमाल किया है तो हमारे इंटरनेट की स्पीड भी कम हो जाती है.

Types Of Antivirus In Hindi

आज मार्केट में आपको कई तरह के एंटीवायरस सॉफ्टवेयर देखने को मिलते हैं जो कि आपके कंप्यूटर को ऑफलाइन और ऑनलाइन इंटरनेट से सुरक्षित रखते हैं .लेकिन सभी एंटीवायरस बढ़िया नहीं होते और सभी एंटीवायरस फ्री नहीं होते. अलग-अलग कंपनियां अलग-अलग तरह से एंटीवायरस बनाती है जैसे कि :-

1. Kaspersky Internet Security

Kaspersky Internet Security  यह एंटीवायरस खास तौर पर इंटरनेट इस्तेमाल करने वालों के लिए बनाया गया है जो कि अपने कंप्यूटर पर सारा दिन इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और तरह-तरह की वेबसाइट को ओपन करते हैं तो उन सभी वेबसाइट से आपके कंप्यूटर को सुरक्षित रखने के लिए Kaspersky कंपनी ने यह इंटरनेट सिक्योरिटी एंटीवायरस बनाया है.

2. Avast Free Antivirus

Avast कंपनी  ने तीन एडिशन में अपने एंटीवायरस बनाएं हैं जो कि अलग-अलग काम करते हैं. 1. Avast Free Antivirus, 2. Avast Internet Security, 3. Avast Premier . सबसे पहला बिल्कुल फ्री है इसमें आपको थोड़े बहुत फीचर मिलते हैं जिससे आप अपने कंप्यूटर को वायरस से बचा सकते हैं . इसके बाद में इंटरनेट सिक्योरिटी एंटीवायरस में आपको कुछ और ज्यादा फीचर दिए जाते हैं जैसे कि फेक वेबसाइट से आपको  सुरक्षित रखते हैं. Phishing वेबसाइट और Phishing ईमेल वगैरह से आपको बचाते हैं.और Avast के प्रीमियर  एंटीवायरस मैं आपको इन दोनों से और भी काफी एडवांस फीचर दिए गए हैं.
Avast कंपनी  ने तीन एडिशन में अपने एंटीवायरस बनाएं हैं जो कि अलग-अलग काम करते हैं. 1. Avast Free Antivirus, 2. Avast Internet Security, 3. Avast Premier . सबसे पहला बिल्कुल फ्री है इसमें आपको थोड़े बहुत फीचर मिलते हैं जिससे आप अपने कंप्यूटर को वायरस से बचा सकते हैं . इसके बाद में इंटरनेट सिक्योरिटी एंटीवायरस में आपको कुछ और ज्यादा फीचर दिए जाते हैं जैसे कि फेक वेबसाइट से आपको  सुरक्षित रखते हैं. Phishing वेबसाइट और Phishing ईमेल वगैरह से आपको बचाते हैं.और Avast के प्रीमियर  एंटीवायरस मैं आपको इन दोनों से और भी काफी एडवांस फीचर दिए गए हैं.

3. ESET Smart Security

कंपनी कई तरह के एंटीवायरस बनाती है जो आपके कंप्यूटर को कई तरह के वायरस से बचाती है. और यह कंपनी सिर्फ कंप्यूटर के लिए ही नहीं एंड्रॉयड मोबाइल के लिए भी एंटीवायरस बनाती है जिससे आप अपने फोन को भी ज्यादा सुरक्षित रख सकते हैं लेकिन इस कंपनी के सभी एंटीवायरस आपको खरीदने पड़ेंगे क्योंकि इनके एंटीवायरस फ्री नहीं है इस कंपनी द्वारा बनाए गए एंटीवायरस की लिस्ट नीचे दी गई है
  1. ESET Smart Security Premium
  2. ESET Smart Security
  3. ESET Cyber Security Pro
  4. ESET Cyber Security
  5. ESET Mobile Security For Android
  6. ESET Parental Control For Android
  7. ESET NOD32 Antivirus 4 For Linux Desktop
इस पोस्ट में आपको बताया गया कि एंटीवायरस क्या होता है एंटीवायरस कैसे काम करता है एंटीवायरस कितने तरह का होता है अगर इसके अलावा कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके जरूर पूछें.










कंप्यूटर की स्पीड बढ़ने के 6 बेस्ट तरीके


कंप्यूटर की स्पीड बढ़ने के 6 बेस्ट तरीके



जब हमारा कंप्यूटर धीमा काम करता है तो हमारा आधा टाइम तो सिर्फ मॉनीटर को देखने में ही चला जाता है, क्योंकि बहुत से सॉफ्टवेयर काम करने के लिए बहुत ज्यादा टाइम लेते हैं और अगर आपका कंप्यूटर Slow  है तो वह सॉफ्टवेयर और ज्यादा टाइम लेने लगेगा जिससे आपका कंप्यूटर काम कर पाना मुश्किल हो जाएगा.
इसीलिए बहुत सी यूजर यह सवाल करते हैं की उनका कंप्यूटर धीमा क्यों है, जब उन्होंने कंप्यूटर नया लिया था, तब उनका कंप्युटर बहुत ही बढ़िया चल रहा था लेकिन जैसे जैसे कंप्यूटर पुराना होता गया कंप्यूटर की स्पीड कम होती गई तो उनकी सवाल के लिए हमारे पास जवाब है कि कंप्यूटर धीमा होने के कई कारण हो सकते हैं. इस आर्टिकल में आप को ऐसे 6 टिप्स बताये है जिनको फॉलो करके आप अपने कंप्यूटर की स्पीड बढ़ा सकते हैं.

Computer में Free Space रखे

शायद आपको नहीं पता कि हमारे कंप्यूटर की हार्ड डिस्क जब भर जाती है तब हमारा  कंप्यूटर स्लो काम करने लगता है. लेकिन बहुत से लोग सोचते हैं की हार्ड डिस्क के खाली होने से या हार्ड डिस्क फुल होने से स्पीड का क्या लेना देना है. लेकिन आपको बता दें कि जब आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क फुल हो जाते हैं तो उसमें जो Data होता है उसे प्रोसेस करने के लिए कंप्यूटर को हार्ड डिस्क Space को इस्तेमाल करना पड़ता है. अगर आपके हार्ड डिस्क में Space नहीं होता तो कंप्यूटर Data को प्रोसेस करने के लिए वह ज्यादा से ज्यादा टाइम लेगा.
तो इसका सिर्फ एक ही Solution है कि आप अपने कंप्यूटर की हार्ड डिस्क को ज्यादा से ज्यादा फ्री रखे. अगर आप आपने कंप्यूटर में ज्यादा Data रखते हैं तो उसके लिए आप External हार्ड ड्राइव का इस्तेमाल करें और जो भी Data आप कम इस्तेमाल करते हैं उस Data को अपने External हार्ड ड्राइव मे Save रखे. जिस से आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क फ्री रहेगी और कंप्यूटर की स्पीड बनी रहेगी

बिना काम से Program को Uninstall कर दें.

कई बार हम अपने कंप्यूटर में कोई सॉफ्टवेयर सिर्फ टेस्टिंग के लिए इंस्टॉल कर लेते हैं, लेकिन बाद में हम उसे अनइंस्टॉल करना भूल जाते हैं जिसके कारण वह हमारी कंप्यूटर मे ही रहे जाता है और कई सॉफ्टवेयर ऑटो स्टार्ट होते हैं मतलब जब विंडो स्टार्ट होती है तो वो सॉफ्टवेयर भी स्टार्ट हो जाते है. ऐसे मे वो सॉफ्टवेयर आपकी कंप्यूटर की RAM और प्रोसेसर का इस्तेमाल करते है जिससे की बिना काम आपके कंप्यूटर की स्पीड कम हो जाती है तो ऐसे सॉफ्टवेयर को आप अपने कंप्यूटर से Uninstall कर दें
Uninstall करने के लिए अपने कंप्यूटर के Control Panel में जाएं और वहां Program & Feature मे जाएं. वहां आपको वो सॉफ्टवेयर मिल जाएंगे उस पर क्लिक करके उसे अनइंस्टॉल करें

Startup Programs को Disable करे

जैसा की मैंने इससे पहले पॉइंट में मैंने बताया कि कुछ सॉफ्टवेयर ऐसे होते हैं जो कि विंडो के साथ ही स्टार्ट हो जाती है और इन प्रोग्राम के कारण आपके कंप्यूटर की स्पीड स्लो हो जाती है. क्योंकि जब आपकी विंडो स्टार्ट होगी उस समय ये स्टार्टअप प्रोग्राम्स आपके कंप्यूटर की RAM और प्रोसेसर का इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं जिसके कारण कंप्यूटर दूसरी प्रोग्राम स्टार्ट करने के लिए पूरी RAM और प्रोसेसर नहीं दे पाता और वो स्लो काम करता है.
इन्हें बंद करने के लिए अपने की बोर्ड से ”Ctrl +Alt +Dlt बटन को दबाएं और Task Manager  को ओपन करके यहां आपको स्टार्टअप की Tab मे जाना है और जो फालतू प्रोग्राम है उनको बंद कर देना है.

Visual Effects बंद कर दे


विंडो 7, विंडो 8, विंडो 10 की स्पीड कम होने मे सबसे ज्यादा हाथ Visual Effects का होता है क्योंकि जब आप कंप्यूटर लैपटॉप लेते हैं तो ग्राफीक मेमोरी के ऊपर ध्यान नहीं देते हैं. सिर्फ RAM और हार्ड डिस्क देख के कंप्यूटर लेते हो तो फिर उसकी स्पीड कम होती है लेकिन कारण किसी को पता नहीं चलता.
तो इस इफ़ेक्ट को बंद करने के लिए सबसे पहले Control Panel में जाइये और Left Side में सर्च बॉक्स में सर्च करें
फिर से Appearance And Perfromance Of Window पर क्लिक करे.
फिर Custom  पर क्लिक करके और जैसे फोटो में दिखाया गया है Show Thumbnails  Of Choice, Smooth Edges Of Screen Font , Smooth Scroll List Boxes पर क्लिक करके और Save कर दें

CC Cleaner का इस्तेमाल करे


Download CC Cleaner 


अगर आपका ग्राफ़िक सिस्टम सही तो आपकी  Temporary फाइल और Corrupted फाइल्स ज्यादा हो गई है, यह फाइल आपको एक साथ नहीं है लेकिन कंप्यूटर की स्पीड कम करने में यह फाइल भी शामिल होती है.  CC Cleaner  एक  ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो आपके कंप्यूटर में जितनी भी Temporary फाइल या Corrupted फाइल है या इंटरनेट की Cache फाइल,  Cookies है, वह डिलीट कर देता है, जिससे आपके कंप्यूटर की स्पीड बढ़ी रहेगी और आपके हार्ड डिस्क का Space भी खाली रहेगा.
  • आप इस सॉफ्टवेयर को डाउनलोड करके और इंस्टॉल कर ले. इसे विंडो XP पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
  • सॉफ्टवेयर को ओपन करते ही आपके सामने ऐसी Screen आएगी जैसे की फोटो में दिखाई गई है.
  • नंबर 1 विंडो और एप्लीकेशन में से जिस की फाइल क्लीन करनी है वह Tick  करें.
  • Analyze पर क्लिक करके आपके सामने Detail आ जाएगी की कौन-कौन सी फाइल डिलीट होने वाली है. अगर आपको लगे कि कोई काम की फाइल है तो उसे Untick करदे और फिर Analyze करके Run Cleaner पर क्लिक कर दें.

Windows दोबारा डाले

अगर आप ऊपर दी गई ट्रिक को इस्तेमाल करके बाद भी अपने कंप्यूटर मे को कोई बदलाव नहीं पाता है तो आप कंप्यूटर में है नई विंडो इंस्टाल करे, क्योंकि बहुत बार ऐसा होता है कि किसी वायरस के कारण हमारा कंप्यूटर Slow हो जाता है और वायरस किसी एंटी वायरस से भी नहीं निकाल पाता. इसीलिए हमें अपने कंप्यूटर में नई विंडो इंस्टाल करने की जरूरत होती है.

निष्कर्ष

आज इस आर्टिकल में हम आपको बताया कि कैसे आप अपने कंप्यूटर की स्पीड को बढ़ा सकते हैं और हम आपको सिंपल ऐसे तरीके बताये. यह Best टिप्स थी जिनकी मदद से आप अपने कंप्यूटर की स्पीड को बढ़ा सकते हैं. लेकिन अगर यह सभी काम नहीं करती है तो आपको अपने कंप्यूटर को अपग्रेड करवाना होगा.
अगर आपके कंप्यूटर में 4GB RAM है तो आपको बढाकर 8GB करवानी होगी और अगर आप का प्रोसेसर पुराना है तो आपको आपके अपने कंप्यूटर में प्रोसेसर को भी अपग्रेड करवाना होगा. क्योंकि कई बार पुराने हार्डवेयर की वजह से भी कंप्यूटर की स्पीड स्लो हो जाती है .

अगर आपके पास भी ऐसी कोई टिप्स है जिनकी मदद से कंप्यूटर की स्पीड बढ़ सकती है तो नीचे कमेंट बॉक्स मैं कमेंट करके बताएं.




















Disk Operating System DOS की जानकारी


Disk Operating System DOS की जानकारी









आपने ऑपरेटिंग सिस्टम के बारे में तो सुना ही होगा। Hardware और User के बीच में Communication करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे पहले DOS डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया था वह User और Hardware को कम्युनिकेट करा पाए। आज हम आपको इस आर्टिक्ल में बताएंगे की डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है। जिसको DOS भी कहते हैं।

Operating System क्या है?

ऑपरेटिंग सिस्टम को समझने के लिए हम एक उदाहरण लेते हैं जैसे के मान लीजिए आपको हिंदी आती है और इंग्लिश नहीं आती है या कोई ऐसी भाषा नहीं आती है जो आपको जरूरी हो ताकि आप दूसरे आदमी से कांटैक्ट कर पाये। तो ऐसा कम्युनिकेशन करने के लिए हम किसी दूसरे आदमी को बुलाते हैं जिसको की हिंदी और इंग्लिश दोनों आती हो। तो यही काम ऑपरेटिंग सिस्टम का है। मान लो हमें कंप्यूटर की लैंग्वेज नहीं आती है और हमें कंप्यूटर पर बताए गए कीबोर्ड का पता है इसको कंप्यूटर को समझाने के लिए हम Operating System का इस्तेमाल करते हैं ताकि Operating System के माध्यम से Computer हमारे बताए गए कमांड को पूरा कर पाएं।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है?



किसी कंप्यूटर सिस्टम में काम करने के लिए यह सबसे जरूरी ऑपरेटिंग सिस्टम है। सबसे पहले इसी सिस्टम का इस्तेमाल करके कंप्यूटर के हार्डवेयर से कम्युनिकेट किया गया था। लेकिन आजकल इसका ज्यादा उपयोग नहीं होता है जो लोग प्रोग्रामिंग लैंग्वेज लिखते हैं वह इसका कुछ इस्तेमाल करते हैं। अब आप विंडो 8 Window 10 जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं जोकि DOS से शुरु हुई थी। डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम(DOS) को टीम पीटरसन ने बनाया था। इसको बाद में 1981 में इसको माइक्रोसॉफ्ट ने लोगों के सामने लाया। DOS को कुछ कमांड देकर आप कई चीजों को बदलाव कर सकते हैं, कई चीजें ओपन कर सकते हैं, इस तरह से डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया और लागू किया गया।

DOS के क्या क्या काम है?

  • डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम(DOS) User को कंप्यूटर से जोड़ने में मदद करता है।
  • नई फाइल बनाना, डिलीट करना और फाइल का नाम चेंज करना इस तरह के काम से DOS से आसानी से किया जा सकता है।
  • DOS से हम कम्प्युटर में Store की हुई फ़ाइल की लिस्ट भी देख सकते हैं और हमारे कंप्यूटर में कितने स्टोरेज है वह भी हम जान सकते हैं।
  • इस सिस्टम से हम हार्डवेयर के बारे में जान सकते हैं। इसके इस्तेमाल से हम अपने कम्प्युटर की फ़ाइल को बैकअप के तौर पर ले सकते हैं।
  • DOS में CPU और मेमोरी को कंट्रोल करता है।
  • DOS में फाइल मैनेजमेंट भी होता है इससे कंप्यूटर की मेमोरी मैनेजमेंट भी की जा सकती है।
  • इसके साथ-साथ है कंप्यूटर की इनपुट/आउटपुट सिस्टम को भी कंट्रोल करता है।

डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम(DOS ) की कमांड निम्नलिखित है?

  • CD:- डायरेक्टरी को चेंज करने के लिए
  • Dir:- किसी फोल्डर मा डायरेक्टरी की लिस्ट देखने के लिए
  • Copy:- फाइल को कॉपी करने के लिए
  • Edit:- फाइल को एडिट करने के लिए
  • Move:- किसी फ़ाइल को Move करने के लिए
  • Ren:- फाइल का नाम बदलने के लिए
  • Del:- सभी File को डिलीट करने के लिए
  • Cls:- स्क्रीन को क्लियर करने के लिए
  • Format:- डिस्क को फॉर्मेट करने के लिए
तो यह जानकारी थी डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम(DOS) के बारे में अगर आपका इसके बारे में कुछ और सवाल हो तो आप हमारे नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं।